घर आंगन के बगिया में बेटियां हमेशा चहकती है, आसमान में जैसे चमकते सितारे, बेटी चमकती ज़मीन पे, ज़िंदगी के घने अंधेरे में रोशनी लेकर चलती है, अपना सब कुछ वार देती है, ज़िम्मेदारियों में जब उतरती है, आप जिन रिश्तों में ढालते हो, वो हर रिश्ते में ढलती है।