मारना पड़ता है अक्सर हमें,
खुद को, अपने सपनों, ख्वाहिशों को,
मिटाना पड़ता है अपना वजूद,
तब कर पाते हैं बच्चों की परवरिश,
काट लेते हैं हम अपने परों को,
तब दे पाते हैं उनके सपनों को उड़ान,
उड़ जाते हैं जब वे खुले आकाश में,
हम रह जाते हैं पीछे अंतहीन
प्रतीक्षा में उनके कभी लौट आने के,
जो अक्सर रह जाती है मात्र प्रतीक्षा ही।
#मारना