सोचिए ज़रूर..!
#मारना
अगर दो लोगोंका तलाक होता हैं
तो गलती सिर्फ़ एक कि ही क्यों निकली जाती हैं?
"कैसी औरत है, संभाल ना पायी अपने पति को "
हर प्रॉब्लम का सोलुशन बच्चें पैदा करो यही बताया जाता है. क्यों नहीं सोचते, क्यों नहीं कहते, उठ! भूल जा सब, छोड़ ये सब पीछे और एक नई जिंदगी शुरू कर ख़ुद के लिए जीना शुरु कर.
बच्चें नहीं होते तो भी दोष उसी मै है, क्यों?
अजी दोष तो आदमी में भी होता है.
लेकिन समाज तो उसे ही दोषी कहेगा. क्यों?
आज भी एक लड़की की शादी के लिए इतना दबाव क्यों समाज का? अठारह की हुईं नहीं कर दो हाथ पीले.
लड़के की उम्र चाहे ढल जाए कोई फर्क नहीं
वो तो लड़का है
ज़ोर से मत हसो, धीरे से चलो, ज्यादा घूमना मत, घर जल्दी आना, किसी लड़के से बात मत करना, समाज क्या सोचेगा, लोग क्या कहेंगे ?
और गलती से भी उस लड़की की शादी देर से तय हो जाए ना तो फिर तो रिश्तेदार हजार अफ़वाए फैलाते है
ज़रूर कुछ चक्कर होगा, तभी तो अब तक कोई पसंद नहीं कर रहा था.
अजी ये भी तो सोचिए, जिसे जिंदगी बितानी है उसे खुद भी तो सही लगे. उसे खुद भी तो समझने का वक्त मिले.
और उसके भी तो सपने होते है,
तो क्या ग़लत है कि वो अपने सपनों से ज्यादा प्यार करती है, तो क्या ग़लत है कि वोह अपने सपनों को आजादी से जीना चाहती है.
आज भी किसी लड़की का बलात्कार होता है तो समाज सारा दोश उसपर ही लगाता है, गुनाह किसी और का है और वो कसूरवार की तरह निगाहें झुकाकर चलती है. घरवाले बदनामी के डर से बात आगे नहीं बढाते और गुन्हेगार खुलेआम ऊंची निगाहों से घूमता है.
सोचिए उस लड़की की ज़िंदगी जो जीतेजी नर्क बन जाती है. मौत से ज्यादा तो हम उसे जीते जी मार रहे है
#मारना