न रंग का ना रुप का
ना जात का ना धर्म का
ईश्वर तो हिसाब रखता है
सिर्फ तेरे कर्म का
ना यक़ीन कर साहिबा
हाथों की लकीरों पर
किस्मत तो उनकी भी होती हैं
जिनके हाथ नहीं होते
कर्म कर तो फल मिलेगा
ये तो विधी का ही लेख है
जिसको तू संजोग कहता
वह कर्म ही खेल है
#कर्मा