में कोंन हूं ,में क्या हूं मुझे हुआ क्या में केसे कहूं
में कोंन हूं ,में क्या हूं मुझे हुआ क्या में केसे कहूं
में बर्बाद हूं पर आबाद हूं में हारा हूं पर किसीका सहारा हूं
में अधूरा सा पर वो शक्स मुजमे पूरा है
में ढलती श्याम सा वो उगता सवेरा है
में भटकता मुसाफिर वो राहते मंजिल
में हूं अगर दर्द तो वो मेरी दवा है
में हूं अगर इबादत तो वो मेरा खुदा है
पर मेरे दर्द की वो वजा नहीं, में खुद से ही खफा हूं
हर चीज की शरुआत की पर कभी उसे खत्म नहीं
में हारा हूं उसे केसे कहूं , उसके बिना अधूरा हूं ए बात उसे केसे समजाऊ , जिंदगी एक अधूरी किताब सी है उसके बिना , मेरे शब्दों में छुपी राज सी है उनकी हर अदा
में चाहकर भी बया न करपाऊ उस अल्फ़ाज़ सि है वो
उसके ना होनेसे सब वीरान और उसके हाने का ऐहसास एक सुकून दे जाए,
एक खूबसूरत ऐहसास है वो 🤗
अधूरी दास्तान.....