वो जब प्यार का इजहार कर रहे थे,
एक तमाशा मेरे साथ हर बार कर रहे थे।
मै ने कहा था बचा लो मुझे,
हम खो जायेंगे अगर साथ ना मिला,
फिर से दूर हो जायेंगे।
बड़ी सिद्दत से आह भरके बोले वो,
तुम ना कहो ऐसे ना दूर हो अपएंगे।
मेरे दिल को जो थोड़ा आराम हुआ था,
सच जान कर भी झूठ पर उसके इतमीनान हुआ था।
मेरी आंखे जब उसके ख़्वाब में डूबी हुई,
उस रात कुछ एसा काम हुआ था।
अगली सुबह जब वो अपनी बात से मुकर गए,
सारे वादों को कुछ इस कदर भूल गए।
मेरे पास कुछ ना याद दिलाने को बचा था,
सच तो मालूम था बस दिल खफा था।
कुछ इस कदर जब मुझ से दूर हो गए।
सारे ख़्वाब मेरे टूट कर चूर हो गए।
वंदना सिह