# गहना
तुम कहो तो दीप को जलता ही रख दूँ
और पावन प्रेम का घृत डालूँ सारा
एक पावन ज्योत जगमग करे मन को
गहना बनकर चमक ले संसार सारा ---
झूम जाएँ तप्त मन के आँगने भी
प्रेम और विश्वास की गर खाद डालूँ
और सारे मेघ फिर बरसा करें जो
शांत मन से स्निग्धता के बीज बो दूँ---
श्रावणी मधुमास की ऋतु स्नेह भर ले
गहना बनकर प्रीत भी श्रृंगार कर ले
स्नेह सबके द्वार पर लिख आऊँ जाकर
प्रेम का गहना सभीके मन सजा दूँ---
तुम कहो तो दीप को जलता ही रख दूँ ---
और फिर सारे कगारे तोड़ आऊँ ----| |
डॉ. प्रणव भारती