वो करते रहते थे बाते मुहबात की बार बार,
पर शायद वो उनके प्यार हम ना थे ,,
लगता रहा कुछ खास है हम तुम्हारे लिए ,
बात तो सच थी पर बस वो खास हम ना थे ,,,
लगाव कुछ इस तरह का था उसे
करीब तो थे हम पर दिल मै सिर्फ ना थे ।
देर सवेर अब संभाल तो लिए खुद को,
दिल से भूलना चाहा पर शायद वह पे भी तुम थे ,,,,,
रहूंगी साथ हमेशा ,,किसी भी राह मै ,
बाते वो कल की तेरी ,पर मेरे लिए ना थी ,,,,
प्रदीप गज्जर ✍️