कहीं दूर से मेरी हंसी की आवाज़ से हंस पड़ता है,
मुझको वो मेरी जान से प्यारा लगता है।
वो थक के चूर होता है, जब काम से घर आता है,
मगर इम्तेहान मेरे होते हैं, और वो मेरे साथ रात भर जागता है।।
बड़ा ही निःस्वार्थ है, बड़ा ही दयालू है,
वो जानता है मगर, कब कौन उसको ठगता है।
वो पिता है बस इसलिए मुझे पाँव छूने नहीं देता,
वरना सच कहूँ तो, वो मुझको ख़ुदा सा लगता है।।
~रूपकीबातें
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