पहले नहीं घबराती थी मौत से,
पर अब डरने लगी हूं मैं,
इसलिए नहीं कि दुनिया से
प्रस्थान नहीं करना चाहती,
भयभीत हूं किसी एक के
अकेले रह जाने पर
उपजे एकाकीपन के अवसाद से,
नहीं करते अधिक वार्तालाप,
पर मजबूत अवलम्ब हैं
हम सदैव एक दूसरे के,
हर विपत्ति काल में खड़े हैं
सदा दृढ़ता से हम हाथ थामे,
माना तमाम शिकायतें सही पर,
हूं तुम्हारी हर मुस्कान पर निछावर,
सबके लिए शिद्दत से समर्पित,
किन्तु अपने प्रति पूर्ण बेपरवाह,
पर अब अपना भी,
खयाल रखने लगी हूं मैं।
हां, अब डरने लगी हूं मैं।।