•किसान•
मुसीबतें उसके घर दवार पर
मूहँ बनाये खडी़ रहती है,
कभी सुखा तो कभी बाढ
उसकी रोटी को खेल बनाये रहती है
कैसी बिडम्बना है इस देश की
पत्थर को पकवान चढाये रखती है,
किसी झोपड़ी में सिमटे शख्स को
'भूख' पत्थर बनाये रखती है
हर चुनाव इनकी फसल इनकी आय को
दोगुना सरकार बनाये रखती है,
विपत्ति जब पडे़, ना कोई सहायता
'आत्महत्या' का गुनाह आखिर कराये रखती है
#manoj kumar (M-kay)