गज़ल
*****
ये सूरज मुझे अब जलाता बहुत हैं,
तुम्हारी ये यादें दिलाता बहुत हैं।
जमाने में उसको नहीं दर्द कोई,
दिखाने को अक्सर वो हँसता बहुत हैं।
हमारे बिना अब बहुत हैं वो तन्हा,
वो बातें दिलों की छुपाता बहुत हैं।
हमें याद करके वो नगमें सुहाने,
दिलों ही दिलों में गुनगुनाता बहुत हैं।
ये हम जानते हैं हमें ये पता है,
उमा अब वो आँसू बहाता बहुत हैं।
Uma vaishnav
मौलिक और स्वरचित