#पूछताछ
पूछताछ तो कर ली थीं सब
फिर क्यों भटक रहे हैं
छोटी सी जो भूल हो गई
उसमें अटक रहे हैं
मानव हैं सब भले-बुरे हैं
हम भी तो उसमें हैं
जाने किस-किसके हाथों में
बस कच्चे मटके हैं
हम कुम्हार अपने ख़ुद ही तो
भाव पकाने होंगे
और फिर उन सबको
सहेजकर,दीप जलाने होंगे
छोटी छोटी बातों से
संवेदन चटख़ रहे हैं
श्वाँस श्वाँस में बस जाए
ढाई आखर सबके
जीवन होवे सफ़ल सभी का
संत बने हम मन से----
डॉ.प्रणव भारती