मेरी बहना है वो....
पापा से गलती छुपाने को
मेरे से रिश्वत लेती है, वो
कहने को मेरे से छोटी है, वो
मगर मोका नहीं छोड़ती मुझे नीचे दिखाने का
जब भी चल पड़ता हूँ मैं,
गलत पद चिन्हो पर
मुझे रोकती है, टोकती है
सही राह दिखने को,
खिच ले आती है मुझे भ्र्मक पथ से
मेरी बहना है वो
घर मे भले ही झगड़ती है
पापा से डाट फड़वाती है
मगर मोहलों की गलियों मे
बांधती है मेरे प्रशंसा के पूल
घर मे मुझे निकमा कहतो है
सहेलियों के सामने हीरो बतलाती है।
वैसे तो हमेशा चाय बनाती है वो,
मगर घर मे किसी के आने पर
मुझे रसोई मे धकेलती है, वो
मेरे हाथो की चाय को लाजवाब बताती है वो
मेरे ऊपर हुक्म चलाती है वो
जब कभी रूठ जाता हूं मै
मुझे आकर मानती है वो
बहुत प्यारी सी है जो
मेरी बहना है वो
हर रक्षाबंधन को अपनी रक्षा का
जरूर धागा बांधती है।मगर
वचन दूसरी लड़कियों के लिए ले लेती है वो
मुझे याद है बचपन की वो बाते
पापा से खुद के लिए पैसे लेती थी ओर
मुझे अंगुठा दिखाती थी वो
मगर उसका आधा हिसा चुपके से
मेरे जेब मे डाल देती थी वो
मेरी बहना है वो
मेरी प्यारी बहना है वो।