सलाम - ए - हसरत रही है दिल में , कभी तो उनको सलाम कहते
अहसास - ए - दिल उनको भी तो होगा , क़यामत से हैं जिसके दिल में रहते
नज़र उठाकर जी भर के तो देखूं , मुद्दत हो गई शर्म - ओ - हया सहते - सहते
उनका दीदार - ए - आलम मैं क्या बताऊं , दीदार से पहले अश्क हैं बहने लगते
#सलाम