तुम जो दगा दो , तो भी सब सह जाऊ मैं
तुम जो कोई दवा दी , चुप - चाप पी जाऊ मैं
मेरे प्रेम रुपी शीतल जल का बहता प्रमाण ही
तुम जो कही तो उसी जल में डूब जाऊँ मैं
पक्के घागे है ये मेरे अरमानों के जो तुम
कहो तो इसका स्थिर हार सजाऊँ मैं
जिस तरह आसमाँ को मोहब्बत है इस धरा से
बिल्कुल उसी तरह हर पल तेरी नजरों में खो जाऊँ मैं ।