Hindi Quote in Story by Rajesh Maheshwari

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आध्यात्मिक ज्ञान की आवश्यकता

स्वामी जी से उनके एक शिष्य ने पूछा कि पशु पक्षी और मानव में क्या अंतर होता है। दोनो ही तो जीव है। उन्होंने इसका उत्तर देते हुए समझाया कि पशु पक्षी अपने बच्चों को सुरक्षित स्थान पर जन्म देकर, उनको भोजन उपलब्ध कराकर उनका पोषण करके सही वक्त पर उन्हें शिकार करने की शिक्षा देते है। यही उनका जीवन है।
आज के वर्तमान युग में माता पिता भी यही सोच रखते है कि बच्चों को जन्म देकर उनका शारीरिक पोषण करके, अच्छी शिक्षा दिलाने के बाद, धनोपार्जन करना सिखाकर, उन्हें अपने पैरों पर खडा कर देना ही उनके कर्तव्य का पूर्ण हो जाना समझते है। इसे ही वे अपने धर्म का पालन करना मान लेते है। यह सोच उचित नही है क्योंकि यदि ऐसा हो तो मनुष्य और पशु पक्षियो में क्या अंतर होगा ?
मनुष्य जीवन एक उच्च उद्देश्य के लिए प्राप्त हुआ हैं जो कि आध्यात्मिक जगत के ज्ञान की प्राप्ति है। सभी माता पिता का कर्तव्य है कि वे अपनी संतान को सिर्फ भौतिक जगत से संबंधित शिक्षा देकर ही अपने कर्तव्य की इति श्री नही समझना चाहिए बल्कि उन्हे भौतिक जगत से आध्यात्मिक जगत की ओर समर्पित होना भी सिखाना चाहिए। प्रभु की कृपा से हमें मनुष्य योनि की प्राप्ति हुई है। हमे अपने धर्म का पालन करते हुए आध्यात्मिक जगत की समुचित शिक्षा बाल्यकाल से ही अपनी संतानों को देना चाहिए। आज समाज में जो विसंगतियाँ और पारिवारिक विच्छेद हो रहे है उसका प्रमुख कारण आध्यात्मिक शिक्षा की कमी है। यदि बच्चों को भौतिक जगत की बातों के साथ साथ आध्यात्मिक ज्ञान भी बाल्यकाल से ही प्राप्त हो तो वे अपनी सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों के प्रति समर्पित रहेंगें।

Hindi Story by Rajesh Maheshwari : 111525838
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