मुझे भिख मांगना अच्छा नहीं लगता है,
क्योंकि,
पुरस्कार या सम्मान की मांग नहीं की जाती,
अगर,
आपकी रचनाएँ अच्छी होंगी तो लोग उनको जरुर सम्मान देंगे,
कई बरसों से में लिखते आया हुँ और उन्हीं कविताओं को स्टेज में यानी के कवि संमेलन में दोहराता भी हुँ लेकिन श्रोताओं से कभी ताली की भिख नहीं माँगी है,
क्योंकि की मुझे मालुम है की माल ओरिजिनल होगा तो अपने आप बिकेंगा,,,,,