बादल जब बरसते थे तो आँगन में खुशी से नाचते,
तब क्या डर कपड़े गन्दे होने या भीग जाने का,
सर्दी भी लगती है , ये किसे पता था..
हां भीगने पर तबियत खराब तो तब भी होती थी..
पर माँ की गोद में सो जाने से सब ठीक हो जाता..
बचपन का वो लड़ झगड़ कर एक हो जाना..
रूठना मनाना फिर बेफ़िक्र हो जाना..
एक सिक्का हाथ में लेकर अमीरों सी खुशी तो केवल बचपन में थी..
सब पास होकर भी नाख़ुश से रहना तो अब सीखे है,
छोटी छोटी खुशियों में भी खिलखिलाकर हँसना,
तो केवल बचपन में था..
दिखावे की ज़िंदगी जीना तो अब सीखे है..
#खुश