जो फैला हैं कोरोना,
प्रकृति कहती है तुमसे,
अब भी सम्भल जाओ,
रोज रोज कर के कचरा,
तुम न मेरे दामन में लगाओ,
पेड़ काट नदी छांट कर,
तुम यू न मुझे बदरंग बनाओ,
जो विचलित हुई मैं सब पलट दूंगी,
हुई केदारनाथ और केरल घटना याद में लाओ,
अब भी समय है सम्भल जाएओ,
सुधर जाओ ठीक हो जाओ,
#ठीक -हो-जाओ