याद आएगी हर रोज़ तेरी,
मगर तुझे आवाज नहीं दूंगा,
मैं लिखूंगा तेरे हीं लिए हर गज़ल,
पर तेरा नाम नहीं लूँगा,
अगर समझ आएँ तो समझ लेना,
मैं समझाने नहीं आऊँगा,
दर्द से भरा मेरा नगमा होगा,
तारीफ तुम्हारे दिल की होगी,
याद आएगी हर रोज तेरी,
मगर तुझे आवाज नहीं दूंगा.....