तुझे झूठ बोल के पा सकता था,
लेकिन,
कल मेरी भी बेटी होंगी,
और,
तुम्हें अच्छा लगे सही लगें ऐसा दिखावा कर सकता था,
लेकिन,
कल मेरी भी बेटी होंगी,
आगे सुन,
तुम्हें पाना मेरे लिए बाएँ हाथ का खेल था,
मगर,
महोब्बत खेल नहीं है,
क्योंकि,
कल मेरी भी बेटी होंगी,
में लड़का हुँ तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता तुम्हें कई बार घुमाने फिराने में,
लेकिन,
कल मेरी भी बेटी होंगी,
इससे अच्छा यही है मेरे दोस्त जिससे सादि करो उससे पुरी सिद्दत से प्यार करो,
किसीके पिताह की मर्यादा(बेटी)को झूठे वादे में और प्यार के जासे में मत फंसाए,
ऐसा क्यों,,,,
कल मेरी भी बेटी होंगी...
यदि आपका प्यार सच्चा है तो आप एक दूसरे के माँ-बाप से वार्तालाप करके दोनों एक हो आएँ,
यदि आप एक दूसरे की ख़ुशी प्राप्त करना चाहतें हो तो यही है कि एक दूसरे में सम्मान लाएँ,
यदि तुम सम्मान नहीं दोगें तो याद रखना की एक ना एक दिन तुम भी बेटी के बाप बनोगे...
कड़वा है पर बहोत ही सुन्दर रचना है
#प्राप्ति