गुमशुदा बचपन
एक धनाढ्य व्यक्ति अपने बच्चों के लिए ढ़ेर सारे खिलौने खरीदकर लाया करता था। कुछ समय बाद बच्चे के बड़े हो जाने के कारण वे सारे खिलौने उनके लिए अनुपयोगी हो गये थे। उस व्यक्ति ने सोचा कि क्यों ना इन्हें गरीब बच्चों में बाँट दिया जाए। जिससे वे भी इनसे खेलकर खुश हो जायेंगें। अपनी इस भावना को कार्यरूप देने के लिए वह पास ही की एक गरीब बस्ती की ओर निकल पडता है। रास्ते में उसे एक गरीब बच्चा मिलता है जिसे वह खिलौना देने की पेशकश करता है। वह बच्चा यह सुनकर बहुत खुश होता है एवं खिलौना ले भी लेता है परंतु अचानक ही कुछ सोचकर उसे मायूस होकर वापिस कर देता है। वह व्यक्ति इसका कारण पूछता है तो वह बच्चा कहता है कि मेरे माता पिता मुझसे भीख माँगने का काम करवाते है अगर वे यह खिलौना देख लेंगे तो समझेंगें की मैंने भीख से प्राप्त पूरे रूपये उन्हें ना देकर उसमें कुछ रूपये से यह खिलौने खरीदे है तो मुझे बहुत मार पडेगी। वह बच्चा यह कहकर चुपचाप चला जाता है। उस व्यक्ति को आगे जाकर एक दूसरा गरीब बच्चा मिलता है। वह उसे भी खिलौने देने की पेशकश करता है परंतु वह बच्चा मना करते हुए कहता है कि मैं तो दिनभर बिडी बनाने का काम करता हूँ, मेरे पास इन खिलौने से खेलने का वक्त ही नही है। यह कहकर वह बच्चा आगे बढ जाता है। कुछ और आगे जाने पर उस व्यक्ति को तीसरा बच्चा मिलता है जो कि सहर्ष ही सभी खिलौने लेकर उसे धन्यवाद देता हुआ चला जाता है। वह व्यक्ति मन में सोचता है चलो देखते है कि यह बच्चा इन खिलौनों के साथ क्या करता है। वह उस बच्चे का पीछा करता है और देखता है कि उसने एक दुकान पर जाकर उन खिलौनों को बेच दिया और उससे प्राप्त राशि से पास ही की एक दवा दुकान से दवा खरीदकर ले जाता है। वह भी चुपचाप उसके पीछे पीछे उसके घर तक पहुँच जाता है। वहाँ उस बच्चे को अपनी बीमार माँ को दवाई पिलाते हुए देखकर द्रवित हो जाता है और उसकी आँखें नम हो जाती है। वह मन ही मन सोचता है कि जिस देश का बचपन ऐसा हो उस देश की जवानी क्या होगी ?