#आतुर
ख़ामोशियों की
भला कोई आवाज़
नहि होती पर
व्यथित कर देती है
आत्मग्लानि से
इंसान ख़ुद को दोषी
मान हर वक़्त
ख़ुद पर मुकदमा चला
ख़ुद को
सज़ा देने के लिए
#आतुर रहता
ऐसे घाव शायद लफ़्ज़
भी ना दे पाए
जो कभी कभी
ख़ामोश नम आँखे
लबों पर एक आह कह
जाती है...l