उममीद ना टूट ने दो , हिम्मत ना हारो
यह दुनिया उसी की है, जिसने जीता है अपने मन को
पहचानो अंदर की शक्ति , हर काम को बेहतर बना लो
डगमगा ने लगे कदम जब मन में हिम्मत को उतारो,
जो करते है सब वो तुम ना करो,कुछ अलग नया करके दिखा दो,
जो समझते नहीं तुम्हारी मन के बेकबी को,
अपनी असफलताओं का चोला उतारो,
उममीद ना टूट ने दो, हिम्मत ना हारो