#तुमdecide
मैं झरना बनकर बह रही
मटके जैसी रह गई,
या तो प्याला कर दे,
या फिर से बहा दे मुझे।
मैं सूरत बनकर सह रही,
सिरत बननी रह गई ?
या तो पूरा सजा ले ,
या फिर सझा दे मुझे।
मैं सदियाँ बनकर जड़ गई ,
लम्हें भर में उड रही!
या तो हाथ कर ले,
या फिर गँवा दे मुझे ।
मैं साँसे बनकर चल रही,
खुदी को ही छल रही!
या तो जान भर दे,
या फिर जला दे मुझे...
© लीना प्रतीश