#पहचान
पानी पर्वत अग्नि हूँ,नभ हूँ मैं अवनि भी हूँ।
तेज़ प्रचंड मैं ऊर्जा हूँ,सागर सी लहरिली हूँ।
गाती हूँ सुरीली हूँ, नाचती हूँ लचीली हूँ।
हँसती हूँ - चहकती हूँ, दुःखों पर नुकीली हूँ।
समग्र मैं संसार हूँ, बँधु हूँ सहेली हूँ ।
आदि हूँ मैं अंत हूँ, सांप्रत हूँ नवेली हूँ ।
©लीना प्रतीश