#मेरीमर्ज़ी
मेरी मरजी़ जो करु
तुम्हें अच्छा लगा, बहुत अच्छे,
नहि लगा और अच्छे।
दिन भर चुपी डालू तुम
अगर ठीक सुनो, बहुत अच्छे,
नहि सुनो और अच्छे।
तारे चुन के बांटु सब, मैं
तुम मान सको, बहुत अच्छे,
नहि मानो और अच्छे।
तेरे हिस्से प्यार मैं भेजू
तुम खूब बटोरो, बहुत अच्छे,
नहि बटोरो और अच्छे।
मैं पवन जलन जल गगन बनू
तुम अवन बनो, बहुत अच्छे,
नहि बनो और अच्छे...
© लीना प्रतीश