#शुरूkareक्या ?
जा के दरिया डूबन लागे
बिन बोले कछु नाव ,
और कछु ना करियो ;
थोड़ो प्रीत को शबद मिलाव !
कडवा लागन लागे
जा को मीठा घर संसार ,
ओ के जीवन जाइके ;
थोड़ो प्रीत को शहद मिलाव !
फिक्का पड जावे जो
जल के धूप में सेकावे ,
ज्यो; उतरे मुख पर
थोड़ो प्रीत को रंग मिलाव
उडन चाहे सबसे उचा
राहन साचा जाते,
एसन कुछ पंछी पर ;
थोड़ो प्रीत को पंख मिलाव !
शुरू करे, पर खूब बिचारे ;
ए ही पूरा ढाए ;
एसो अंत में जाई के ;
थोड़ो प्रीत को तंत मिलाव !
राधा का भवतारण होवे -
मीरां के पद गावे !!
किसना मेरे धरम में
थोड़ो प्रीत को अरथ मिलाव...
© लीना प्रतीश