वो भी क्या दिन थे
वो भी क्या दिन थे
जब हम स्कूल जाते थे
सुबह जल्दी जल्दी उठना
फिर जल्दी तय्यार होना
और अच्छा लंच लेना
और उस लंच को चोरी
छिपे खाना, भारी बैग लेके जाना
प्रार्थना के समय खेलना
जल्दी जल्दी स्कूल का काम
करना, टीचर के डर के मारे
जल्दी जल्दी कॉपी चेक कराना
छुट्टी के समय जल्दी जल्दी
घर के लिए भागना
स्कूल जाते समय पेसे माँगना
कितनी अच्छी थी ना वो जिंदगी
जो काफ़ी पीछे छूट चुकी है
आज तो हर तरफ परेशानी
ही परेशानी है, कहीं नोकरी
की परेशानी है, कहीं चोरी
कहीं दुष्कर्म, कहीं नंबर वन
ना होने का डर, कहीं बॉस की
डांट का डर, कहीं बीमारियो
का डर, और ना जाने कितनी
ही परेशानियां है,
वो भी क्या दिन थे.