शक्रगुजार है दिल, जिसने रहेमत पाई है
दुआ किसीकी दिल, आज काम आई है
मन्नतों का दोर, बहुत चला मन के फेरे मैं
दिल को मिला आराम, मन्नत काम आई है
ओ रहेमत ए दिल फरिस्ता,अजब गज़ब तू
नेकदिल वाले की नज़र, आज़ यहाँ छाई है
हुन्नर कैसा हकीकी , जिंदा मार ही देती है
आबे हयात पिलाती, कुरबानी बस पाई है
दुरस्त कर देती है, राहे वफा महोबत यकीनन
मंजिल खुदा की खुद मैं , दरअसल पाई ली है