पग लड़खड़ात ज्यों रसना लतपटात
बोलन चाहूं कुछ और बात
पर निकसे मुख कुछ और बात
मुस्काने की नहीं कोई बात
पर मुसकाऊं मैं बिना बात
मन में आए कुछ ऐसी बात
मिल गया हो जैसे सुर का साथ
तृष्णा मिट गई है जीवन की
मिल गया हो ज्यों कृष्णा का साथ
हर लिया हो ज्यों जीवन का भार
उड़ती जाऊं मै बिन आधार
ये जादू है या चमत्कार
मुझे समझ न आए बार - बार
सुमिर किया भगवान को जब
समझी मै उसकी नटखट ये चाल
बस गया है मेरे ज़हन में अब
सबका दुलारा नंद गोपाल
#झेन