चाहे तपती रेत मिले या,
भंवर पड़ी हो पाँवों में,
#उत्साही जन कभी न रुकता,
ऐसी छोटी बातों से।
चाहे लक्ष्य असंभव सा हो,
चाहे विकट परिश्रम हो,
#उत्साही मन कभी न रुकता,
ऐसे नन्हें कारण से।
चाहे आँधी लगे उड़ाने,
या भीषण बरसात हो,
#उत्साही तन कभी न रुकता,
ऐसे तृणसम घात से।
#उत्साही