मैं केवल जीवन नही सिखाता, मृत्यु भी सिखाता हु। मैं अस्तित्व के एक हिस्से की उपेक्षा नही करता, तुम्हारे अंदर विभाजन नही करता, मैं अस्तित्व की समग्रता सिखाता हु।
शक्ति जब दो हिस्सों में विभाजित हो जाती है, तो जीवन का खेल शुरू हो जाता है। शक्ति एक हो जाती है, खेल बंद हो जाता है। शक्ति एक हो जाती है तो प्रलय हो जाता है। शक्ति दो में बंट जाती है तो सृजन हो जाता है। जीवन दो विरोधियों के बीच खेल है। ये विरोधी लड़ भी सकते हैं, तब युद्ध हो जाता है। ये दो विरोधी मिल भी सकते हैं, तब प्रेम हो जाता है। सृजन दो के बिना मुश्किल है। और शक्ति एक हो जाने पर सब समाप्त हो जाता है, प्रलय हो जाता है 🙏🙏
Anil Mistri
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