. "किसी से क्या छुपा है ll
हर जगह ही खुदा है ll
किसी से क्या छुपा है ll
सब उसकी ही नीमत है;
सब उसका ही दिया हुआ है ll
किसी से क्या छुपा है ll
जब जब हुई मेहरबानी किसी पर;
सबने कहा उसने कबूली दुआ है ll
किसी से क्या छुपा है ll
यह और बात है कि अब तक तू दिखा नही;
कहते हैं सब-के दिल ऐ रूह में तू रुका है ll
किसी से क्या छुपा है ll
आज कटती और मरती इंसानियत को देखकर;
यक़ीनन तेरे साथ, मेरा दिल भी बहुत दुःखा है ll
किसी से क्या छुपा है ll"