मेरे जीने की वजह तुम हो तो हो क्या फर्क पड़ता है
तुम सही हो या गलत उन्हें गढ़ने दो तर्क जो गढ़ता है
ऐसे भी हैं ज़माने में अपने जो हमें रौंद के आगे बढ़ता है
हमें खुशी से करके बर्बाद सफलता की सीढ़ी वो चढ़ता है
मुझे चाहत नहीं ऐसे अपनों की जो अपनत्व के लिए लड़ता है
जिसके साथ सहज लगे जीवन उसके साथ उम्र गुज़ार दें
सही - गलत के फेर में न पड़कर , सरल बनकर जीवन संवार लें
#गलत