तो क्या उन्हे पसंद आओगी तुम?
जो तुझे हर दिन लाल-हरी चूड़ी में देखते थे,
वो तूझे आज सूनी कलाई में देखेंगे,
तो क्या उन्हे पसंद आओगी तुम?
जो तुम्हे हर दिन रंगबिरंगे साडी़ में देखते थे,
उन्हें सफेद रंग पसंद न होने पर,
तुम साड़ी में सफेद रंग कति ही पसंद नहीं करती थी,
वो आज तूझे सफेद साड़ी में देखेंगे,
तो क्या उन्हे पसंद आओगी तुम?
ये जो बिंदी से उन्होंने इश्क़ कराया थाथा तूझे,
आज तेरा सूना माथा देखेंगे,
तो क्या उन्हे पसंद आओगी तुम?
कभी तुने उनकों हार नहीं मान ने दी,
और आज तुमने ही हार मान ली,
तो क्या उन्हे पसंद आओगी तुम?
तुम्हारे सच्चे होने पर पूरी दुनिया से लड़ जाता था,
आज तुमने सच होने के बावजूद हार मान ली,
तो क्या उन्हे पसंद आओगी तुम?
-khushbu chhatbar