हम कर दें शंखनाद,,
कि दसों दिशाओं में गूंज उठे
ऊर्जा की नयी प्रतिध्वनि,,,
जान रहे या न रहे,
दुश्मनों का रक्त जमा देंगें,,
अगली बार आंख उठाने से पहले
उनके कानों में शंखनाद का स्वर गूंज उठे,,
वर्षों पुराने दर्द का भी हिसाब मांगा जाएगा
रक्त के एक एक कतरे का जवाब मांगा जाएगा,,
अब सोचना नहीं,निर्णय करना होगा
अब शांति नहीं,युद्ध करना होगा,,