स्वरोजगार
विधायक अमर सिंह अपने क्षेत्र वासियों के ऊपर बहुत ध्यान देते थे। वे चाहते थे कि उनके क्षेत्र में गरीबी दूर होकर संपन्नता आये इसलिये वे प्रतिदिन शासकीय योजनाओं के अंतर्गत प्रतिदिन अत्यंत गरीब लोगों को धन प्रदान करके मदद करते थे। उन्हें विश्वास था कि इससे संपन्नता के साथ साथ मतदाता भी उनसे प्रभावित होगें।
कुछ माह के बाद वे अपने मित्र विधायक सुमेर सिंह से मिलने पहुँचे, उन्होने महसूस किया कि उनके क्षेत्र की जनता अपेक्षाकृत ज्यादा संपन्न है, उन्होने इसका राज जानने हेतु सुमेर सिंह से पूछा कि तुम भी शासकीय योजना के अंतर्गत धन का उपयोग करते हो फिर तुम्हारे और मेरे विधानसभा क्षेत्र में इतनी असमानता क्यों है ?
सुमेर सिंह ने कहा कि तुम्हारी और मेरी कार्यशैली में अंतर है तुम मुफ्त में धन लुटाते हो मैं गरीब लोगों को स्व सहायता समूह बनाकर उन्हे भिन्न भिन्न किस्म के रोजगार सिखाता हूँ जैसे अगरबत्ती बनाना, माचिस बनाना, कपडे सिलना, मैकेनिक, इलेक्ट्रीशीयन आदि। वे मेहनत करके अपना कार्य करते हैं एवं उसके एवज में उन्हें यह धन प्राप्त होता हैं, जिससे उनमें स्वावलंबन की भावना भी विकसित होती है।
विधायक अमर सिंह भी इस योजना को अपने क्षेत्र में लागू करने का प्रयास करते है परंतु वे इसमें असफल हो जाते हैं क्योंकि उनके क्षेत्र के लोगो को मुफ्त में धन प्राप्त करने की आदत हो गयी थी।
आगामी चुनाव में आशा के विपरीत अमरसिंह चुनाव हार जाते हैं परंतु उनके मित्र सुमेर सिंह भारी मतों से विजयी होते हैं। इसका जब विश्लेषण हुआ तो पाया गया कि अमर सिंह द्वारा मुफ्त में धनराशि बाँटने का उन्हे कोई फायदा प्राप्त नही हुआ जबकि सुमेर सिंह की स्वरोजगार की योजना से प्रभावित होकर जनता ने उन्हे समर्थन दिया।