Hindi Quote in Poem by Dr kavita Tyagi

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जमाना कहता आया है कि मैं एक अबला नारी हूँ ।
आप घर-बाहर के मालिक हैं , मैं बेबस और बेचारी हूँ ।।
मुझे तुम अबला कहते हो तो , मन में क्रोध होता है
मैं चुप रह जाती हूँ , क्योंकि मुझे यह बोध होता है
सहिष्णुता और क्षमा से ही प्रेम-उपभोग होता है
समर्पित तन-मन करके ही आज मैं तुझसे भारी हूँ

जमाना कहता आया है कि मैं एक अबला नारी हूँ ।
आप घर-बाहर के मालिक हैं , मैं बेबस और बेचारी हूँ ।।

मेरे हृदय उद्गारों को, आप सुनते नहीं जब
मेरे अनमोल वचनों को कभी गुनते नहीं जब
मेरी आँखों के आँसू पलकों से चुनते नहीं जब
तभी मैं खांड-सी मीठी , बनी तीखी कटारी हूँ ।
जमाना कहता आया है कि मैं एक अबला नारी हूँ ।
आप घर-बाहर के मालिक हैं , मैं बेबस और बेचारी हूँ ।।

Hindi Poem by Dr kavita Tyagi : 111475508
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