कोई हमारा कुछ भी न होते हुए दिल के कितने पास होता है, इसका अहसास हमें उसके दुनिया से चले जाने के बाद होता है ।मैं बात कर रहा हूँ हमारे शहीदों की, हमारे सितारों की, जो असमय ही हमें अपनी यादों में दुखी छोड़ कर इस जहाँ से अलविदा कह जाते हैं । मैं जानता हूँ कि आत्महत्या का कदम इंसान हद से ज्यादा टूट जाने के बाद ही उठाता है, लेकिन काश!वह अपनी जिंदगी को एक मौका और देता ।शहीदों की मृत्यु पर हमारा सीना चौड़ा हो जाता है, हमें फख्र होता है, उन पर, लेकिन राजपूत जैसे मामले में हमें बहुत दुख होता है कि आखिर कैसे एक हँसता मुस्कराता नौजवान जिसको शायद किसी बात की कमी महसूस नहीं होती होगी (मेरे अनुसार)ऐसा कदम उठा लेगा ।
आज के युग में जहां पैसा, पावर और सबसे आगे रहने की होड़ मची हुई है, लोग छोटी छोटी बातों पर भी बड़े 2कदम उठा लेते हैं और प्रकृति की सबसे खूबसूरत कृति स्वयं अपने ही हाथों मिटा देते हैं ।अब भी समय है कि मानव चेते
और परिवार, अपने आदर्शों, मूल्यों तथा पृकृति की महत्ता को समझे वरना कभी-कभी रीटेक का अवसर नहीं मिलता है ।🙏