# Sleepy
इन उनींदी आँखों में तेरी ही तस्वीर है ,
समा जाऊँ तुझमें क्या कोई तदबीर है ?
पूजा भी कर लीं कितनी और पाठ जाने कितने
आठों प्रहर तुम्ही को बस ढूँढती हूँ जग में
ये क्यों भुला दिया है मन साफ़ करलें अपना
कुछ दिन का ताना -बाना ,कुछ दिन का सपना
भीतर ही तो बसा है ,कण-कण में तू छिपा है
मैं हूँ उनींदी कितनी ,तू हर समय जगा है
बात इतनी सी है मन को बुहार लें हम
और बाँट लें सब ही पल ,जीवन सुधार लें हम !!