कौन हूँ मैं??????
एक अनसुलझी पहेली हूँ,
खुद की सहेली हूँ,
मतलबी इस दुनिया में.....
हाँ, थोड़ी अकेली हूँ....
काँटों भरी राहों पर,
नंगे पाँव चलती हूँ,
उम्मीदों की गठरी,
लिए फिरती रहती हूँ....
कभी भरी आँखो से,
बेबाक हँसती हूँ,
कभी बंद पलकों पें,
ख्वाब टूटे सहेजती हूँ....
वजूद को अपने बचाने,
दांव पेंच लड़ती हूँ,
दुनिया के नियम तोड़,
पैर पें अपनें खड़ी हूँ....
तोड़ न पाओगें,
तिनका हूँ,
सहेज न पाओगें,
हर ओर बिखरी हूँ.....
मतलबी इस दुनिया से,
रोज लड़ती हूँ,
फिर भी इस दुनिया में,
एक अड़ीग चुनौती हूँ......!!!!!