कहो कान्हा,
बनूँ कैसे,
#योग्य तुम्हारे ?
तुम निश्च्छल मन,
में ईर्ष्या वश,
आऊं कैसे,
निकट तुम्हारे?
तुम बंसी धुन,
में कर्कश स्वर,
बैठूँ कैसे
अधर तुम्हारे?
तुम शांत चित्त
में चंचल मन,
थामूं कैसे
हाथ तुम्हारे?
तुम सदानंद,
में अतृप्त मंद
झांकू कैसे,
हृदय तुम्हारे?
कह दो कान्हा,
जैसी भी हूँ,
में ही हूँ एक,
#योग्य तुम्हारे ।।
#लायक = #योग्य