।। हम जी लेंगे ।।
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खुशनुमा है जिंदगी मेरी,
जालिम अब लौट कर ना आना,
गई थी तू , गई है ,चली जाना,
मोहब्बत कसम खुदा की अब, दोबारा नहीं करेंगे,
अब तो कब्र में भी तुम्हेंं याद नहीं करेंगे,
अब फुर्सत में भी तेरी तस्वीर नहींं जलेगी,
अब मेरे दिल का वो टुकड़ा फिर नीलाम होगा,
फर्क बस इतना है की उसका भाव अब आम न होगा,
और जिंंदगी के जिन तरानो में साथ दिया था तुमने मेंरा,
उन तरानों में ही जहर घोलकर पी लेंगे,
बेफिक्र हों जा हम तेरे बिन जी लेंगे,
बनने को तो हम सलुके की दीवार बन जाएंगे ,
जरूरत पड़ी तो हमदर्दी का पहाड़ बन जाएंगे ,
वैसे भी कहा जमाना आपकी फितरत याद रखता हैं,
काम था , काम हुआ , काम के लिए ही तो जमाना साथ रखता हैं,
वरना मुझ से फकीर को कौन याद रखता है।
।। सुनील नायक।।
राम