उसने शोर तो किया था...
लेकिन, थमता गया,
उसकी चूड़ियों की खनक में,
तो कभी पायल की झनकार में,
तो कभी कूकर की सीटीयों में,
तो कभी दाल के झोंक के आवाज में,
तो कभी सिलबट्टे के शोर में,
तो कभी माता-पिता आंसूओ में,
तो कभी अपने रोती हुई बच्चों की आवाज में,
उस का शोर थम सा गया.
-khushbu chhatbar