महोबत मेरा धर्म है , इमान है आबरु है हमे ना शीखलाओ हद मे रहना यारो महोबतमे रहना ही हमारी हद है।। क्या रख्खा है नफरतो मे अरे संसारके खोखले रीत रीवाज ओर बंधनो मे एक बार सच्चे दीलसे महोबत का पान करके देखो खुद ही जान जाओगे की महोबत मे कीतना दम है, एक महोबतही एसी चीज है जीसका दर्द भी मीठा लगता है, कीतना भी तडपे मगर महोबत को भूलना कठीन है,
Raajhemant