सबसे बड़ी अगर कोई बाधा है जीवन में,तो वह है निराशा। हम थोड़ी देर में ही परिस्थिति के आगे घुटने टेक लेते हैं। किसी संग दोष के कारण, किन्ही बातों के प्रभाव में आकर निराश हो जाना, यह संयोग जन्य स्थिति है। आनंद , प्रसन्नता, उत्साह...मूल स्वभाव तो हमारा यही है।
- सप्रेम हरिस्मरण