हमारे पुरखों ने सही कहा है कि समय की चाल पर मीनमेख मत निकालो ....बस उसके साथ सचेत होकर चलते जाओ । यदि आप समय के प्रति समर्पित हो गए तो समय जवाबदेह बन जायेगा और वह आपको वहाँ लाकर छोड़ देगा जहाँ आपको होना चहिए जो आपकी आत्मा की मज़बूती के लिए जरूरी होगा ।
मेरा भी निम्न बातों पर पूरा विश्वास है क्योंकि ये अनुभव मुझे जिंदगी ने दिये हैं । आप मनुष्य हैं तो मनुष्यता ही आपकी सुंदरता हो सकती है , और कुछ नहीं । इसी बात को सिद्ध करने के लिए संसार आपके साथ कुछ रचता है ।उसको आप खेल कह सकते हैं या जो आप चाहें कि ऐसा सच्ची बुराई करने वाला मिलेगा जो आपको सिरे से सुधार देगा । ऐसा उत्साहित करने वाला मिलेगा जो आपको आगे चलने की लिए प्रोत्साहित कर देगा। ऐसा झूठ बोलने वाला मिलेगा जो आपको सत्य बोलने पर मजबूर कर देगा । ऐसा चापलूस मिलेगा जो आपको मौन की ओर मोड़ देगा । शुभम अस्तु
-कल्पना मनोरमा