गजल
इतनी बड़ी बात ना छुपाइये
गर इश्क है, तो बता भी दीजिए
इश्क में महफिल और तन्हाई दोनों है
एक बार इनसे भी गुजर कर देखिए
गर आप शमां है, तो मैं परवाना हूँ
एक बार इस परवाना को जलने तो दीजिए
माना की इश्क में वेबफाई है आजकल
पर एक बार मुझको भी आजमाकर तो देखिए
ये शाम फिर ना आएगी
ये मोहब्बत फिर ना मिलेगी
कर लो जान निसार मुझपर
ये जवानी फिर ना आएगी
जमाने को देखकर कब तक
इजहार-ए-मोहब्बत ठुकरोगी
गर मिल रही है मोहब्बत
इसे रुसवा ना करो
कर लो कबूल इसे,वरना
दुबारा इसे ना पाओगी
:कुमार किशन कीर्ति, युवा शायर
-- Kumar Kishan Kirti
https://www.matrubharti.com/bites/111443414